WithinYOU POETRY

The words of deep emotion are here.

Monday, February 25, 2019

मैं जानना चाहता हूं

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सुनो बापू तुम कहां हो क्या तुम भी परलोक सिधार गए मैंने बचपन से केवल तुम्हारा नाम सुना और एक दिन जाना कि तुमने तो केवल आजादी दिलाई थी...
Friday, December 28, 2018

अनजान रास्ते

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किस्सा-१ देखो कैसे बिछड़े, भटके वह अनजाने, रास्ते कैसे मिल जाते हैं कौन जाने कहां शुरू जाने कैसा सफर किया मगर एक दूजे को पाते ही देख...
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Yuvraj Singh
कुछ विचार जो मन में आंदोलित होकर कलम से उतरना चाहते हैं और मैं उन्हें शब्दों में पिरोकर एक सुंदर माला में गूंथने का असफल प्रयास करता हूँ और यह माला समाज को अर्पित है।
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