WithinYOU POETRY

The words of deep emotion are here.

Sunday, April 07, 2019

फर्क

›
यहां पेड़ों पर मछलियां बैठी हैं, उधर पानी में चिड़िया तैर रही हैं, आज रात भर सूरज छाया था, दोपहरी में, चांद सफेदी फैला रहा...
1 comment:
Monday, February 25, 2019

मैं जानना चाहता हूं

›
सुनो बापू तुम कहां हो क्या तुम भी परलोक सिधार गए मैंने बचपन से केवल तुम्हारा नाम सुना और एक दिन जाना कि तुमने तो केवल आजादी दिलाई थी...
‹
›
Home
View web version

About Me

My photo
Yuvraj Singh
कुछ विचार जो मन में आंदोलित होकर कलम से उतरना चाहते हैं और मैं उन्हें शब्दों में पिरोकर एक सुंदर माला में गूंथने का असफल प्रयास करता हूँ और यह माला समाज को अर्पित है।
View my complete profile
Powered by Blogger.