WithinYOU POETRY

The words of deep emotion are here.

Thursday, March 26, 2020

वीरान शहर

›
जगमग महलों से झांकती खिड़कियां देखती हैं, वीरान पड़ा शहर वह कांप उठी शहर की वीभत्सता देखकर जो डर के मारे माँ के आंचल में छुप जाना चाहती है पर ...
5 comments:
Thursday, March 19, 2020

हे मेघा तुम अब आये

›
स्वप्न देखे बीज बोकर रातों की नींदें खोकर फसल जब लहराई सिंचाई की जरूरत आयी चारों तरफ तब सूखा था कुआ खुद ही भूखा था मिट्टी में दरारें थी किसा...
2 comments:
‹
›
Home
View web version

About Me

My photo
Yuvraj Singh
कुछ विचार जो मन में आंदोलित होकर कलम से उतरना चाहते हैं और मैं उन्हें शब्दों में पिरोकर एक सुंदर माला में गूंथने का असफल प्रयास करता हूँ और यह माला समाज को अर्पित है।
View my complete profile
Powered by Blogger.