The words of deep emotion are here.

पंखे में धूल

Poetry comes from the highest happiness or the deepest sorrow. - A.P.J.ABDUL KALAM

Wednesday, February 21, 2018

तौलिया

आज आंगन के कोने में रखा एक कपड़ा नजर आया जिसने थोड़ी देर पहले निचोड़कर,मरोड़कर और बहुत कष्ट झेलने के बाद भी फर्श के सारे कीटाणुओं को अपना दुश्मन समझ मर डाला था ये वही पुराना हो चुका तौलिया जो कुछ वक़्त पहले, कभी दादाजी गले में, पापा के कंधो पर, मां के माथे पर रहा करता जिससे कुछ समय पहले मुंह पोछना और हाथ पोछना  जैसे काम लिए जाते यह वही नया तौलिया था जिसे मां माथे में पहन पड़ोसन को चिढाया करती यह वही यादों का तौलिया...
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Tuesday, February 20, 2018

The cracks in house

I heard  the cracks in the house symbolise something but once I caught them whispering the uneasy moment I had but I remain quite carefully listened them it was not about their colour not about their future and even not about the wealth hanging over them like human do what they are whispering is we are a part of this earth the same soul we have If we are derived from same soul so we are one not different the only thing human not talk about the humanness serve love,get love if we all have to end in same soul why...
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Friday, February 16, 2018

पंखे में धूल

उस छत से लटकते पंखे में समय समय पर  कुछ धूल जम जाती  और कभी कभी कुछ जाले भी लग जाते  जब भी मैं,सीधा लेट सो रहा होता तो छत के उस दृश्य को देख  एक डरावना एहसास होता  मगर गर्मियों के आने से पहले मुझे वह पंखा,हमेशा साफ करना पड़ता था  कभी कभी ऐसा लगता था जैसे वह पंखा मुझसे कुछ कहना चाहता हो मगर मैं अभी छोटा ही था,नासमझ था और जैसे जैसे मैं बड़ा हुआ  मैंने एक बात और गौर की  धूल जाड़ों तक आते-आते  एक मोटी परत सी बना जाती  और अगर एक भी भिनभिनाती मक्खी...
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Thursday, February 15, 2018

धूल

हवा के साथ फुहार सी निर्झर उड़ती जाती धूल मौसम में बहार सी नित्य एहसास कराती धूल बारिश में सौंधी खुशबू खींच कहीं से लाती धूल शरीर लतपत हो जाए गर अपनापन ले आती धूल बच्चों के खिलौने की कमी दूर करती धूल जमीन से ऊंचा उठने पर जमीं पर पटक जाती धूल बंजर पड़े गांवों को चादर सी ढक जाती धूल आंगन की उन यादों पर मरहम सी छा जाती धूल तूफानों से दंगल करती कहर सी बन जाती धूल कभी नवीन संदेशा बनकर लंबा सफ़र तय कर जाती धूल यादों...
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Monday, February 12, 2018

The dream

When getting out of bed Reminds me the dream I have seen I make lot efforts But only beutiful of those Remain for few moments Some for few days Gives the painless relieve After every journey of failure The dreams which create A great suspense How all things are  So closer to me Are these real Atleast not fake  Are the incidents Going in our daily life But some says Dream have stopped to came  In my sleep The...
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Sunday, February 11, 2018

Shining drops

The drops Shines in light Like a diamond Which fell on your screen Which are quite salty Taste them Called tears Are the symbols, Are the means, Are the way, To show your happiness After  Writing the beautiful words You have collected After a lot efforts Don't go them waste Keep on writing Fill the sorrow  With words of lov...
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Wednesday, February 07, 2018

जिंदगी : एक पहेली

जब मुझसे कहा गया ,जिंदगी की हकीकत साबित कर मैंने पूछा अपनी जिंदगी से, अपने अंदर से क्या यह संभव है कैसा भविष्य दिया मुझको , कैसे तेरा अतीत वया करू क्या इनसे सच्चाई बोलू,क्या पैगाम जारी करू सच बोलू तो रो जाएंगे,कहानी गढ़ू तो खो जाएंगे केवल कुछ पल में ही जिंदगी कैसे साबित करू क्या सीख जाऊंगा यहां से,खुद से कैसे बात कहूं अपनी मर्ज कैसे बताऊं, या औरो की बात कहूं एक अवसर जो मिला है,उसका कैसे अब बखान करू बिना किसी मेरे कर्म के,एक...
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Thursday, February 01, 2018

जिंदगी

सुबह  से लेकर शाम तक थकान है जिंदगी छोटी छोटी बातों में आने वाली  मुस्कान है जिंदगी मनुष्य के सत्कर्मों की पहचान है जिंदगी हर गिरते पड़ते क़दमों पर एक पैगाम है जिंदगी कभी संसार की मोहमाया से डूबी है जिंदगी कभी किसी पश्चाताप का आवरण है जिंदग...
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